Mr. Gyan Prakash
दिव्यांग वर्ग समाज के अटूट अंग हैं और बराबरी के आर्थिक एवं सामाजिक साझेदार भी। अतः समाज और देश की उन्नति के लिये आवश्यक है कि उन्हें मुख्य धारा में पुनर्वासित किया जाये। मुख्य धारा में पुनर्वासित होने के लिये उत्कृष्ट शिक्षकों से युक्त न केवल विशेष विद्यालय की आवश्यकता है बल्कि सामान्य विद्यालयों में भी विशेष शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों के द्वारा दिव्यांगजनों को एकीकृत शिक्षण दिया जाना आवश्यक है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुये और ज्ञान के प्रकाश को चहुँओर फैलाने के उद्देश्य से प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से ज्ञानप्रकाश विद्यालय की स्थापना की गयी। यह विद्यालय इंजी. श्री ज्ञानप्रकाश जी को समर्पित है। वह स्वयं अति दयालु प्रवृत्ति के थे और उनके मन में हमेशा दिव्यांगों के लिये सेवाभाव रहता था।
यह विद्यालय मूलतः दिव्यांगों के लिये बनाया गया है लेकिन इसमें सामान्य छात्रों के साथ विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के द्वारा एकीकृत शिक्षण की व्यवस्था है। इस विद्यालय में दिव्यांग छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने एवं मुख्य धारा में शामिल होने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिये उनसे किसी भी प्रकार का शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाता है। यह विद्यालय कौशाम्बी के सैय्यद सरावां क्षेत्र में स्थापित किया गया है जहाँ न कोई विशेष विद्यालय है और न किसी विद्यालय में एकीकृत शिक्षण की व्यवस्था है।