Welcome to Prakash Kiran Educational Institution

प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट के अन्तर्गत प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट अध्यापकों का निर्माण करने के लिये की गयी है। यह संस्थान विशेष शिक्षा में प्रशिक्षण देने वाला कौशाम्बी का पहला संस्थान है। प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान की स्थापना के प्रेरणा स्रोत डा0 प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव हैं। वह सम्पूर्ण जीवन शिक्षा के क्षेत्र से जुडे रहने की अदम्य लालसा मन में रखते थे और उन्होने जीवनभर ऐसा ही किया। डा0 प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव इतिहास के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं लाला लक्ष्मी नारायण डिग्री कालेज सिरसा इलाहाबाद के प्राचार्य थे। विधि का विधान अटल है। उनके परिवार को उनके असमय देहावसान की त्रासदी झेलनी पड़ी। असमय देहावसान के पूर्व उन्होने 40 वर्षो तक लगातार छात्रों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने का कार्य किया। वह बेहद दयालु प्रवृति के थे। उन्होने 'नेकी कर दरिया में डाल' लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुये शिक्षा एवं पुनर्वास के क्षेत्र में असीमित कार्य किये जिससे लोग आत्मनिर्भरता पूर्व उत्कृष्ट जीवन जी सकें। उन्होने निस्वार्थ भाव से अपने सम्पूर्ण जीवन को समाज के लिये समर्पित कर दिया था।

डा0 प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव कि इच्छानुसार शिक्षा के प्रकाश को सर्वव्यापी बनाने का कर्म करने के लिये उनकी पत्नी डा0 किरण श्रीवास्तव ने प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट की नींव डाली। डा. किरण श्रीवास्तव शिक्षा के क्षेत्र में पिछले 43 वर्षां से लगातार कार्य कर रही हैं। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. संस्कृत में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में उत्कृष्ट शोध करने के पश्चात् गरीब छात्राओं के कल्याण के लिये प्रवक्ता संस्कृत के रुप में के.पी.गर्ल्स इण्टरमीडिएट कालेज इलाहाबाद में कार्य किया और वहीं से प्रधानाचार्या के रुप में सेवानिवृत्त हुयीं। इन्होंने अपने पति की इच्छाओं के अनुरुप छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने एवं पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य करने के उद्देश्य से प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट के अन्तर्गत प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान की स्थापना की। ‘‘तमसो मा ज्योतिर्गमय‘‘-यह संदेश देता हुआ यह संस्थान ‘प्रकाश-किरण‘ इन दोनों के नाम के अर्थ को सार्थक करे- शिक्षा का प्रकाश सर्वव्यापक करने का प्रयत्न सदा करता रहे यही इस संस्थान का उद्देश्य है। यह संस्थान पुनर्वास शिक्षा में उत्कृष्ट अध्यापकों का निर्माण करने के लिये कटिबद्ध है। इसके अतिरिक्त प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट के अन्तर्गत ही गरीब दिव्यांग छात्रों को मुफ्त उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने एवं उन्हे आत्मनिर्भरता पूर्व बनाने के लिये ज्ञानप्रकाश विशेष विद्यालय की स्थापना भी की गयी।

प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान की प्रबन्धक डा. स्मिता शिक्षा के क्षेत्र से जुडी हुयी हैं एव इन्होंने अंग्रेजी विषय में पी.एच.डी. किया है। डा. किरण श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अपने प्रबन्धकीय कौशल का निर्वहन करते हुये यह प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान एवं ज्ञानप्रकाश विशेष विद्यालय के कुशल प्रबन्धन का कार्य कर रहीं हैं। बच्चों के प्रति स्नेह और पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य करने की उत्कट इच्छा से इन्हें संस्थान की प्रबन्धक बनने की प्रेरणा मिली।



प्रकाश-किरण शिक्षण सस्थान एवं ज्ञान प्रकाश विद्यालय की स्थापना प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डा. ऋतुराज के अथक् परिश्रम का परिणाम है। डा. ऋतुराज भी शिक्षा जगत से जुड़े हुये हैं एवं वर्तमान में कुलभाष्कर आश्रम स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष है।

प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान इस समय निम्न पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।

1. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा श्रवण बाध्यता (H.I.)
2. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा दृश्य एवं श्रवण बाध्यता (D.B.)
3. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा आटिज्म स्पेसिफिक डिस्आर्डर (A.S.D.)

उपरोक्त पाठ्यक्रम में कोई भी सामान्य व्यक्ति प्रवेश ले सकता है और इसमें प्रवेश के लिये न्यूनतम योग्यता 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति एव अनुसूचित जनजाति के लिये 45 प्रतिशत) अंको के साथ इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम को माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद (Special Appeal 130, 131 of 2014) माननीय उच्चतम न्यायालय एवं N.C.T.E. के गजट 23 अगस्त 2010 एवं 29 जुलाई 2011 में दिये गये निर्णय के अनुसार D.Ed. विशेष शिक्षा को B.T.C. (D.El.Ed.) के समान दर्जा देने का निर्देश दिया गया है एवं सभी स्कूलों में विशेष शिक्षा के कुछ शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी, इसलिये विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित अध्यापकों की मांग बढ़ी है और भविष्य में यह मांग कई गुना होगी, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अत्यधिक अवसर सृजित होंगें। इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करने एवं T.E.T. उत्तीर्ण करने के बाद प्राथमिक शिक्षक के रुप में सरकारी नौकरी मिलने की सम्भावना अत्यधिक रहती है।

Dr. Smita Srivastava
Manager

Manager's Message :-

दिव्यांग वर्ग समाज के अटूट अंग हैं और बराबरी के आर्थिक एवं सामाजिक साझेदार भी। अतः समाज और देश की उन्नति के लिये आवश्यक है कि उन्हें मुख्य धारा में पुनर्वासित किया जाये। मुख्य धारा में पुनर्वासित होने के लिये उत्कृष्ट शिक्षकों से युक्त न केवल विशेष विद्यालय की आवश्यकता है बल्कि सामान्य विद्यालयों में भी विशेष शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों के द्वारा दिव्यांगजनों को एकीकृत शिक्षण दिया जाना आवश्यक है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुये और ज्ञान की किरणों और प्रकाश को चहुँओर फैलाने के उद्देश्य से प्रकाश-किरण चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान एवं ज्ञान प्रकाश विद्यालय की स्थापना की गयी है। प्रकाश-किरण शिक्षण संस्थान इस समय निम्न पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।

1. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा श्रवण बाध्यता (H.I.)
2. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा दृश्य एवं श्रवण बाध्यता (D.B.)
3. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा आटिज्म स्पेसिफिक डिस्आर्डर (A.S.D.)

उपरोक्त पाठ्यक्रम में कोई भी सामान्य व्यक्ति प्रवेश ले सकता है और इसमें प्रवेश के लिये न्यूनतम योग्यता 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति एव अनुसूचित जनजाति के लिये 45 प्रतिशत) अंको के साथ इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम को माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद (Special Appeal 130, 131 of 2014) माननीय उच्चतम न्यायालय एवं N.C.T.E के गजट 23 अगस्त 2010 एवं 29 जुलाई 2011 में दिये गये निर्णय के अनुसार D.Ed विशेष शिक्षा का B.T.C. (D.El.Ed.) के समान दर्जा देने का निर्देश दिया गया है एवं सभी स्कूलों में विशेष शिक्षा के कुछ शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी, इसलिये विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित अध्यापकों की मांग बढ़ी है और भविष्य में यह मांग कई गुना होगी, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अत्यधिक अवसर सृजित होंगें। इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करने एवं ज्ण्म्ण्ज्ण् उत्तीर्ण करने के बाद प्राथमिक शिक्षक के रुप में सरकारी नौकरी मिलने की सम्भावना अत्यधिक रहती है।

इसके अतिरिक्त ज्ञान प्रकाश विद्यालय मूलतः दिव्यांग बच्चों के लिये बनाया गया है लेकिन इसमें सामान्य छात्रों के साथ विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के द्वारा एकीकृत शिक्षण की व्यवस्था है। इस विद्यालय में दिव्यांग छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने एवं मुख्य धारा में शामिल होने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिये उनसे किसी भी प्रकार का शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाता है। यह विद्यालय कौशाम्बी के सैय्यद सरावां क्षेत्र में स्थापित किया गया है जहाँ न कोई विशेष विद्यालय है और न किसी विद्यालय में एकीकृत शिक्षण की व्यवस्था है।

Certificate of Approval & Recognization

Course


1. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा श्रवण बाध्यता (H.I.) D.Ed Special Education Hearing Impairment (H.I.)
     2. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed विशेष शिक्षा दृश्य एवं श्रवण बाध्यता (D.B.) D.Ed Special Education Deaf and Blind (D.B.)
             3. दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) D.Ed दो वर्षीय ;चार सेमेस्टरद्ध (A.S.D.) D.Ed. Special Education Autism Specific Disorder (A.S.D.)

प्रवेश के लिये न्यूनतम योग्यता :-

उपरोक्त पाठ्यक्रम में कोई भी सामान्य व्यक्ति प्रवेश ले सकता है और इसमें प्रवेश के लिये न्यूनतम योग्यता 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति एव अनुसूचित जनजाति के लिये 45 प्रतिशत) अंको के साथ इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम को माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद (Special Appeal 130, 131 of 2014) माननीय उच्चतम न्यायालय एवं N.C.T.E माननीय उच्चतम न्यायालय एवं D.Ed.विशेष शिक्षा को B.T.C. (D.El.Ed.) के समान दर्जा देने का निर्देश दिया गया है एवं सभी स्कूलों में विशेष शिक्षा के कुछ शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी, इसलिये विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित अध्यापकों की मांग बढी है और भविष्य में यह मांग कई गुना होगी, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अत्यधिक अवसर सृजित होंगें। इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करने एवं T.E.T उत्तीर्ण करने के बाद प्राथमिक शिक्षक के रुप में सरकारी नौकरी मिलने की सम्भावना अत्यधिक रहती है।